इस पोंगल पर घर की छत पर वही पुरानी हंसी फिर से गूंजे।
इस त्योहार पर दादी की रसोई की खुशबू फिर से याद आती है।
आपका आने वाला साल भी इस उत्सव जैसा भरपूर और मीठा हो।
मट्टू पोंगल पर हमारे मूक साथियों, गायों-बैलों को भी नमन।
Pongal reminds us the land gives only what we give it first.
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