रोज़ की पाँच नमाज़ें सिखाती हैं कि सब्र और नज़्म साथ-साथ चलते हैं।
पाँच वक़्त की नमाज़ मुझे रोज़ याद दिलाती है कि मैं कभी अकेला नहीं हूँ।
नमाज़ के बाद का सुकून बताता है कि सुकून हमेशा मेरे पास ही था।
नमाज़ का मुसल्ला वो जगह है जहाँ मुझे मज़बूत होने का दिखावा नहीं करना पड़ता।
Ya Rab, forgive what I know I've done wrong and what I don't even realise.
We use cookies for analytics and, where shown, to serve ads. By using wishyou.in you agree to our Privacy Policy.