नमाज़ वो पाँच लम्हे हैं जब दिल को याद आता है कि उसका असली ठिकाना कहाँ है।
नमाज़ वो पाँच लम्हे हैं जब दिल को याद आता है कि उसका असली ठिकाना कहाँ है।
नमाज़ वो पाँच लम्हे हैं जब दिल को याद आता है कि उसका असली ठिकाना कहाँ है।