नमाज़ के बाद का सुकून बताता है कि सुकून हमेशा मेरे पास ही था।
या अल्लाह, आज का दिन जैसा भी हो, मेरा भरोसा मेरी फ़िक्र से पहले पहुँचे।
May my namaz teach me the patience my life outside it often forgets.
रोज़ की पाँच नमाज़ें सिखाती हैं कि सब्र और नज़्म साथ-साथ चलते हैं।
सजदे में सर झुकाते ही सारी परेशानियाँ छोटी और अल्लाह की रहमत बड़ी लगने लगती है।
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