मेरी दुआ में वो सब भी शामिल हों जिनका नाम लेना मैं भूल गया।
जब ज़बान अल्लाह के ज़िक्र में मशगूल हो, तो दिल में शिकवे टिक ही नहीं पाते।
या अल्लाह, मेरी ज़बान को अपने ज़िक्र से और दिल को हर कीने से पाक रख।
In the quiet of sajdah, all my worries feel small and Your mercy feels endless.
नमाज़ वो पाँच लम्हे हैं जब दिल को याद आता है कि उसका असली ठिकाना कहाँ है।