व्रत का हर पल तपस्या है, और डूबते सूरज को अर्घ्य उस तपस्या का उत्तर।
अर्घ्य देते समय जो सन्नाटा होता है, उसमें ही सबसे बड़ी प्रार्थना छिपी होती है।
छठ में कोई पंडित नहीं चाहिए, बस निष्ठा और नदी का किनारा काफी है।
छठी मैया की चौखट पर सिर झुकाया, सारा दुख वहीं छूट गया।
May Chhathi Maiya bless your home with the same steadiness the sun shows every dawn.