अर्घ्य देते समय जो सन्नाटा होता है, उसमें ही सबसे बड़ी प्रार्थना छिपी होती है।
अर्घ्य देते समय जो सन्नाटा होता है, उसमें ही सबसे बड़ी प्रार्थना छिपी होती है।
अर्घ्य देते समय जो सन्नाटा होता है, उसमें ही सबसे बड़ी प्रार्थना छिपी होती है।