Chhath doesn't need grand temples — a riverbank and an honest heart are enough.
सूप में फल सजाते हाथ कांपते नहीं, क्योंकि श्रद्धा भार नहीं जानती।
जल में खड़े होकर जब हाथ जुड़ते हैं, तब शब्दों की जरूरत नहीं रहती।
जो सूरज को अस्त होते समय भी पूजे, वही सच्चा भक्त है।
इस छठ, आपकी हर मनोकामना सूर्य की किरणों के साथ पूरी हो।