आपने पढ़ाया कम, जीना ज़्यादा सिखाया — यही तो असली शिक्षा है।
मास्टर जी की डांट में भी प्यार छुपा होता था, आज समझ आता है।
आज जो भी अच्छा हूं, उसमें आपकी मेहनत का हिस्सा है — धन्यवाद गुरुजी।
बच्चों के भविष्य को गढ़ने वाला हाथ, सबसे कीमती हाथ होता है।
जो हमें सही और गलत में फर्क सिखाए, वही सच्चा गुरु है।