अपने ज़ख़्मों को नासूर बन जाने दो, जब तक उनका इलाज़ तुम्हारी सफलता न बन जाए। — S.S. Rawat
अपने ज़ख़्मों को नासूर बन जाने दो,
जब तक उनका इलाज़
तुम्हारी सफलता न बन जाए।
अपने ज़ख़्मों को नासूर बन जाने दो,
जब तक उनका इलाज़
तुम्हारी सफलता न बन जाए।