इस रमज़ान आपका सदका खामोश हो, आपकी इबादत सच्ची हो और आपका दिल वाकई हल्का महसूस करे।
इस रमज़ान आपका सदका खामोश हो, आपकी इबादत सच्ची हो और आपका दिल वाकई हल्का महसूस करे।
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यह रमज़ान वो हो जब कोई पुरानी नाराज़गी आखिरकार माफ़ी में बदल जाए।
शब-ए-क़द्र आपको जागा हुआ, विनम्र और वही मांगते हुए पाए, जिसकी आपके दिल को सच में ज़रूरत है।
इस रमज़ान मगरिब की अज़ान की आवाज़ आपके पूरे दिन की सबसे मीठी राहत बने।
इस रमज़ान की आखिरी दस रातें आपके लिए सबसे सच्ची, सबसे जागी हुई और सबसे उम्मीद भरी हों।