इफ्तार की मेज़ पर जितने ज़्यादा अपने हों, बरकत उतनी ही बढ़ जाती है।
इफ्तार की मेज़ पर जितने ज़्यादा अपने हों, बरकत उतनी ही बढ़ जाती है।
इफ्तार की मेज़ पर जितने ज़्यादा अपने हों, बरकत उतनी ही बढ़ जाती है।