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अहिंसा मुट्ठी उठने से बहुत पहले, उस विचार में शुरू होती है जो दूसरे को तुच्छ समझता है।

अहिंसा मुट्ठी उठने से बहुत पहले, उस विचार में शुरू होती है जो दूसरे को तुच्छ समझता है।

अहिंसा मुट्ठी उठने से बहुत पहले, उस विचार में शुरू होती है जो दूसरे को तुच्छ समझता है।
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