तुम्हारा-मेरा होना, सिर्फ़ पास होने से कहीं ज़्यादा ज़रूरी है। — S.S. Rawat
तुम्हारा-मेरा होना,
सिर्फ़ पास होने से कहीं ज़्यादा ज़रूरी है।
तुम्हारा-मेरा होना,
सिर्फ़ पास होने से कहीं ज़्यादा ज़रूरी है।