राधा के बिना कृष्ण अधूरे हैं, कृष्ण के बिना राधा — जन्माष्टमी इसी प्रेम का उत्सव है।
राधा के बिना कृष्ण अधूरे हैं, कृष्ण के बिना राधा — जन्माष्टमी इसी प्रेम का उत्सव है।
राधा के बिना कृष्ण अधूरे हैं, कृष्ण के बिना राधा — जन्माष्टमी इसी प्रेम का उत्सव है।