गुरु की डांट में भी वात्सल्य छिपा होता है, यह समझना ही शिष्यत्व है।
गुरु की डांट में भी वात्सल्य छिपा होता है, यह समझना ही शिष्यत्व है।
गुरु की डांट में भी वात्सल्य छिपा होता है, यह समझना ही शिष्यत्व है।