True equality was not preached by Guru Nanak from a distance — he lived it, ate it, and served it at...
True equality was not preached by Guru Nanak from a distance — he lived it, ate it, and served it at every langar.
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इस गुरुपुरब पर हम सब मिलकर प्रेम, समानता और सेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प लें।
गुरु नानक जी ने सिखाया कि ईश्वर मंदिर, मस्जिद या गुरुद्वारे में नहीं, बल्कि सच्चे कर्मों में बसता है।
जो अपने भीतर अहंकार मिटाकर विनम्रता को अपनाता है, वही सच्चे अर्थों में नानक जी का अनुयायी है।
सतगुरु के चरणों में नमन, जिन्होंने अंधकार में सत्य का दीप जलाया।