जो हाथ आज लंगर बांटते हैं, वे कल किसी और का बोझ भी उतनी ही सहजता से उठाएंगे — यही गुरुपर्व की सीख है...
जो हाथ आज लंगर बांटते हैं, वे कल किसी और का बोझ भी उतनी ही सहजता से उठाएंगे — यही गुरुपर्व की सीख है।
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गुरुपर्व की मिठास प्रसाद में नहीं, बल्कि उस विनम्रता में है जो हम गुरु के दर पर सिर झुकाकर पाते हैं।
May the teachings of the Gurus bring peace to your heart. Happy Gurpurab!
On this Gurpurab, may the flags fluttering atop the gurdwara remind you that devotion is meant to be visible, shared, and joyful.
जहाँ सेवा है, वहाँ अहंकार नहीं टिकता — इस गुरुपर्व पर यही सीख अपने साथ ले जाएं।