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जो हाथ आज लंगर बांटते हैं, वे कल किसी और का बोझ भी उतनी ही सहजता से उठाएंगे — यही गुरुपर्व की सीख है...

जो हाथ आज लंगर बांटते हैं, वे कल किसी और का बोझ भी उतनी ही सहजता से उठाएंगे — यही गुरुपर्व की सीख है।

जो हाथ आज लंगर बांटते हैं, वे कल किसी और का बोझ भी उतनी ही सहजता से उठाएंगे — यही गुरुपर्व की सीख है...
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