गुरुपर्व की सच्ची पहचान वह पंगत है जहाँ राजा और रंक एक ही थाली में बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं।
गुरुपर्व की सच्ची पहचान वह पंगत है जहाँ राजा और रंक एक ही थाली में बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं।
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May the diyas lit tonight be small compared to the light the Gurus have already placed within you.
गुरुपर्व पर संगत का साथ ही सबसे बड़ा उपहार है, जो अकेलेपन को भी अपनेपन में बदल देता है।
गुरुपर्व की मिठास प्रसाद में नहीं, बल्कि उस विनम्रता में है जो हम गुरु के दर पर सिर झुकाकर पाते हैं।
May Waheguru's blessings be with you and your family always.