गुरुपर्व की मिठास प्रसाद में नहीं, बल्कि उस विनम्रता में है जो हम गुरु के दर पर सिर झुकाकर पाते हैं।
गुरुपर्व की मिठास प्रसाद में नहीं, बल्कि उस विनम्रता में है जो हम गुरु के दर पर सिर झुकाकर पाते हैं।
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गुरुपर्व की खुशियाँ तभी पूरी होती हैं जब हम किसी अजनबी को भी अपने परिवार जैसा प्रेम दे पाएं।
May this Gurpurab find you standing in some queue for langar, sleeves rolled up, ego set aside.
Wishing you a Gurpurab where seva feels less like duty and more like the most natural thing in the world.
आज नगर कीर्तन की शोभायात्रा हमें याद दिलाती है कि श्रद्धा को बांटने से वह और गहरी होती जाती है।