आज संगत में बैठकर मौन में जो शांति मिलती है, वह किसी भी शब्द से बयां नहीं हो सकती।
आज संगत में बैठकर मौन में जो शांति मिलती है, वह किसी भी शब्द से बयां नहीं हो सकती।
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आज गुरुद्वारे में जलते दीयों के साथ-साथ हर दिल में भी गुरु की ज्योति जगमगाए, यही गुरुपर्व की सच्ची शुभकामना है।
गुरुपर्व की रौनक सिर्फ सजावट में नहीं, संगत के इकट्ठा होकर एक स्वर में कीर्तन गाने में है।
आज नगर कीर्तन की शोभायात्रा हमें याद दिलाती है कि श्रद्धा को बांटने से वह और गहरी होती जाती है।
गुरुपर्व की खुशियाँ तभी पूरी होती हैं जब हम किसी अजनबी को भी अपने परिवार जैसा प्रेम दे पाएं।