उसकी पीठ पर पड़े कोड़ों ने हमारे घावों को भरने का मार्ग खोल दिया।
आज का दिन हमें सिखाता है कि सच्चा प्रेम बदले की नहीं, त्याग की भाषा बोलता है।
यह दिन आँसुओं का है, पर इन्हीं आँसुओं में हमारी मुक्ति छिपी हुई थी।
A day of reflection, faith and gratitude for grace.
सूली पर टंगा वह शरीर था, पर उसमें बसी आत्मा ने पूरी मानवता को गले लगाया।
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