There's a version of today that's still going well. Choose that one.
दोपहर के इस पल में बस इतना जान लीजिए — आप याद किए जा रहे हैं।
थोड़ी थकान, थोड़ी चाय, और थोड़ी सी मुस्कान — यही तो दोपहर है।
दोपहर का यह पल भी उतना ही खास है जितनी सुबह।
क्या दोपहर की धूप में भी कोई मुस्कुरा सकता है? आप कर सकते हैं।