जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा — ये धुन बचपन से दिल में बसी है।
इस चतुर्थी, पुराना बोझ विसर्जित हो और नई शुरुआत का स्वागत हो।
एक हाथ में मोदक, दूसरे में आशीर्वाद — यही तो हैं हमारे बप्पा।
विसर्जन के वक्त आँखें नम होती हैं, पर दिल में उम्मीद रहती है — अगले बरस तू फिर आ।
Somewhere between the aarti bells and the crowd's chant, worries just quiet down.