Five days a year, an entire state runs on ashirwad and street food.
शेर पर सवार माँ को देखकर लगता है, हर मुश्किल हारने के लिए ही बनी है।
अष्टमी की अंजलि में जो सुकून है, वो साल भर कहीं नहीं मिलता।
ढोल की थाप पर पैर खुद-ब-खुद थिरकने लगें, तो समझिए पूजा शुरू हो गई।
नई साड़ी, नया धोती, पुरानी दोस्ती — बस यही तो है बंगाल का उत्सव।
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