इच्छाओं को सींचने से वे बढ़ती हैं, उन्हें बस देखने से वे स्वयं शांत हो जाती हैं।
इच्छाओं को सींचने से वे बढ़ती हैं, उन्हें बस देखने से वे स्वयं शांत हो जाती हैं।
इच्छाओं को सींचने से वे बढ़ती हैं, उन्हें बस देखने से वे स्वयं शांत हो जाती हैं।