बुद्ध की मुस्कान संसार के लिए नहीं थी, वह एक शांत मन की साक्षी थी।
बुद्ध की मुस्कान संसार के लिए नहीं थी, वह एक शांत मन की साक्षी थी।
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सच्ची शांति बाहर नहीं, भीतर की चुप्पी में बसती है।
क्रोध को त्यागना सबसे बड़ा साहस है, क्षमा करना सबसे बड़ी शक्ति।
आज की पूर्णिमा याद दिलाती है कि जो सब कुछ त्याग देता है, वही सब कुछ पा लेता है।
May you find today what the Buddha sought under the Bodhi tree: not answers, but stillness enough to stop asking.