Maryada Purushottam — the title itself is a lesson in restraint.
अवध की गलियों में आज भी राम जन्म की गूंज सुनाई देती है।
राम नाम में इतना बल है कि पत्थर भी तैरने लगे — यही श्रद्धा का सत्य है।
The forest didn't make Ram less of a king. It made the crown less of the point.
एक तीर, एक वचन, एक धर्म — राम का जीवन इन्हीं तीन में समाया है।