A king who chose exile over deceit — that's the story Ram Navami asks us to remember.
इस राम नवमी अपने भीतर के अहंकार को थोड़ा वनवास दे दीजिए।
हनुमान का समर्पण और राम का धैर्य — दोनों बिना एक-दूसरे के अधूरे हैं।
रावण के दस सिर थे, पर राम के एक वचन के आगे सब झुक गए।
Wishing you the courage and grace of Maryada Purushottam Ram.